Sunday, December 25, 2011

अब तो आँखे खोलो

हिन्दुओ अब तो आँखे खोलो ..२० करोड़ मुल्लो की धार्मिक भावना होती है ,
२ करोड़ ईसाई की भी धार्मिक भावना होती है ,लेकिन १०० करोड़ हिन्दुओ की धार्मिक भावना नहीं होती है क्यों ?
आने वाले दिनों में मुल्ले और ईसाई की माँ बहन की इज़त तो होगी लेकिन हिन्दुओ की नहीं !
हिन्दू देवी देवता के अपमान को देख हम नज़र घुमा लेते है ,या चिला चिला कर गल्ला ख़राब कर के बैठ जाते है ,
लेकिन मुल्लो पर जब आन पड़ी तो एक भोस्डू मुफ्ती एजाज अरशद कासमी चोंधू संतोष पांडेय के जरिये
मान्निये न्यालय में याचिका डाल कर धार्मिक भावना को ठेश पहुचने वाले कंटेंट को फेसबुक और कई सोसल नेटवर्किंग साईट से हटाने का
आदेश आया है , जज साहब हम हिन्दुओ को तो सोसल नेट्वोर्किंग तो क्या हमारे सामने हमारे धर्म को कोई लात मारे तब भी ठेश नहीं पहुँचता
क्यों की हम हिन्दू सेकुलरिज्म नामक दवा और सर्वधर्म सम्भाव नामक अधर्म प्रूफ जैकेट पहनते है !

Monday, May 23, 2011

स्वामी दयानन्द सरस्वती, स्वामी सरधानन्द जी







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कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेत् शतं समाः।
एवं त्वयि नान्यथेतोऽस्ति न कर्म लिप्यते नरे।। यजुर्वेद अ. 40, मं. 2
મનુષ્યો માટે યોગ્ય છે કે વેદોને અનુકૂળ કર્મ કરતાં કરતાં જ સો વર્ષ સુધી જીવવાની ઇચ્છા રાખે. માત્ર આ એક જ માર્ગ છે, બીજો કોઈ નહીં કે જેના પર ચાલવાથી મનુષ્ય કર્મ બન્ધનમાંથી છૂટીને મોક્ષને પ્રાપ્ત કરી શકે.
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